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Monday, 31 October 2022
Friday, 27 November 2020
सम्पादकीय भाजपा के लिए है अवसर,बदले बिहार की तकदीर और करे जनता के दिलों पर राज...
सम्पादकीय
विनोद आनंद
क्या इस बार भाजपा का बड़बोलापन,और जुमलेबाजी महंगा पड़ने बाला है... या अपने बेहतरीन प्रदर्शन से राज्य की जनता के दिलों पर राज्य करने का मौका..?
यह सबाल बिहार के राजनीतिक गलियारों में उठने लगा है। चुनाव के समय राजद ने बेरोजगारी का मुद्दा उठाकर जनता से वादा
किया था कि कैबिनेट की प्रथम बैठक में ही बिहार के 10 लाख युवाओं को रोजगार देने के लिए पहल शुरू कर देंगे। राजद के इस वादा पर जदयू ने सबाल उठाते हुए कहा था कि तनखाह देने के लिए पैसे कहाँ से लाओगे ? नीतीश जी ने तो यहां तक कह दिया था कि क्या जेल से पैसा आएगा।
इस सबाल के जवाब में तेजस्वी ने पूरे आत्मविश्वास के साथ कहा था कि विधायक मंत्री का पैसा रोक देंगे लेकिन युवाओं को रोजगार देंगे।
परंतु जदयू ने इस तरह के किसी वादे से बचते रहे । लेकिन भाजपा ने राजद से दो कदम आगे बढ़कर वादा किया कि हम बिहार में 19 लाख लोगों को रोजगार देंगे।
इसका असर भी हुआ।इस वादा के बाद बिहार में भाजपा के वोटों का ग्राफ बढ़ा,भाजपा एनडीए में जदयू को पछाड़ते हुए सबसे बड़ी पार्टी बनी।नीतीश जी भाजपा के कृपा से मुख्यमंत्री बने। अब नीतीश जी के लिए यह 19 लाख लोगों का रोजगार गले की फांस बनती जा रही है।
इधर कैबिनेट की प्रथम बैठक के बाद तेजस्वी ने एलान कर दिया है कि अगर एनडीए अपने वादे के अनुसार एक महीना के अंदर 19 लाख युवाओं को नौकरी नही दिया तो हम युवाओं और हमारे 1.5 करोड़ मतदाताओं के साथ सड़क पर उतरेंगे।
राजद को इस मुद्दा के साथ बिहार में एक बड़ा आंदोलन का मौका मिले उस से पहले सरकार को रोजगार का रोडमैप बनाकर जनता के सामने रख देना चाहिए।
क्योंकि रोजगार ऐसा मुद्दा है जिस पर युवाओं को संगठित करने में कोई ख़ास दिक्कत नही होगी।इस मुद्दा को लेकर उतरने से अपार जनसमर्थन भी मिलेगा और आंदोलन भी तेज होगा।वैसे बिहार की भूमि आंदोलन और क्रांति की भूमि रही,महात्मा गांधी से लेकर जयप्रकाश की सम्पूर्ण क्रांति ने देश की दशा और दिशा बदल दी थी,इस लिए इस धमकी को हल्के में सरकार को नही लेनी चाहिए!
अगर हम पिछली बात करें तो वैसे बिहार में नौकरी के मामले में सरकार हमेशा उदासीन रही।पिछले चार साल में बिहार सरकार के पास स्वीकृत पद पर अमूमन 4.5 लाख नौकरी अभी भी रिक्त है लेकिन सरकार उसे भर पाने में असमर्थ रही।इतने बड़े कोरोना काल में भी सरकारी अस्पतालों में स्वस्घ्य कर्मी की कमी रही जिसे सरकार वहाल करने में असमर्थ रही।
नीतीश सरकार ने शिक्षा विभाग में भी सरकार की सारी प्रक्रिया के अनुसार शिक्षकों को बहाल किया लेकिन उसे समान काम समान बेतन नही दिया।जिसके कारण शिक्षक नाराज चल रहे है।
कमोवेश यही हाल हर विभाग में है जहां डेलीवेजेज और अनुबंध पर लोगों को काम पर रखकर काम चलाया जा रहा है।
लेकिन सरकार ने विधायकों और मंत्रियों की सुविधाएं बढ़ायी,मानव श्रृंखला और हरित क्रांति के नाम पर करोड़ों खर्च किये, लेकिन रोजगार और राज्य में कल कारखाना लगाने के नाम पर सरकार उदासीन रही।
इसीलिए इस बार बिहार सरकार के पास अवसर है ।भाजपा को अपना पोरफोर्मेन्स दिखाने का मौका भी है। केंद्र और राज्य में भाजपा की सरकार कहे जाने वाली स्थिति भी है।ऐसे में बिहार की तकदीर बदलने, युवाओं को रोजगार देने के दिशा में सरकार कारगर कदम उठा सकती है।
अभी सभी विभागों के रिक्त हुए पदों पर बहाल करने की प्रक्रिया सरकाऱ शुरू करे। राज्य में उद्योग लगाने के लिए कानूनी प्रावधानों को लचीला बनाये, अफसरशाही पर अंकुश लगाए, नीतीश जी को बोल्ड प्रशासक बनने की भी जरूरत है। बिहार की तस्बीर तभी बदल सकती है।
अभी बिहार को विशेष राज्य की दर्जा की दरकार है, नीतीश जी जब राजद के साथ थे तो इस मुद्दा को उठाते रहे लेकिन जब भाजपा के साथ आ गए तो इस मांग पर उनका धार ढीला हो गया।इस बार बाढ़, बीमारीं, बेरिजगरी और शिक्षा के लिए सुविधा विहीन बिहार को विशेष राज्य की दर्जा जरूरी है सरकार इस पर भी गंभीर बने।
Thursday, 20 February 2020
संपादक की कलम से
-------------------------------यह जहर देश को कहां ले जाएगा ?
--- बिनोद आनंद
एक खबर आई पश्चिम बंगाल से ।नादिया जिला में एक 24 वर्षीय शख्स कृश्णा देवनाथ ने जय श्री राम का नारा लगाया तो भीड़ ने उसे पीट पीट कर मार डाला ।उसकी हत्या के लिए तृणमूल कांग्रेस के समर्थको का हाथ बताया गया ।दूसरी घटना झारखंड की है जो कुछ दिन पहले झारखंड में हुई थी । मो तबरेज को भीड़ ने जय श्री राम नही बोलने पर 18 घंटो तक पोल में बांध कर पिटता रहा और अंततः जेल जाने के बाद उसकी मौत हो गयी ।
यह दोनों घटना तो बहुत छोटी सी लगती है,हम सोचते हैं कि चलो भीड़ ने ऐसा कर दिया । दोषी को सजा मिल
जाएगी ,कानून अपनी प्रक्रिया के तहत काम करके इन समस्याओं का समाधान कर लेगा।
लेकिन ,सबाल उठता है कि किया इसका हल यहां से हो जाएगा ?
आज इन जहर का बीजारोपण कहाँ से हो रहा है, इस तरह की भवनाएं कहाँ से आ रही है ,कौन लोग हैं जो इस तरह की सोच आज के युवाओं में पैदा कर रहे है ।और कियों ? यह कई सबाल है जिसका जबाव जब तक नही तलाशा जाता है तब तक इस बीमारीं का इलाज नही हो सकता । आज आप फेसबुक या अन्य सोशल साइट पर जाइये इस तरह के वीडियो आप को बहुत ज्यादा मिलेंगे जो नफरत के जहर को फैला रहे हैं । और सारे लोग अपने को किसी न किसी सियाशी पार्टी विशेष के समर्थक बताएंगे ।जाहिर है यह सोच यह विचारधारा आज राजनीति का एक हिस्सा बनता जा रहा है ।और जब तक यह होता रहेगा तब तक हम इसे नही रोक पाएंगे।
यह बहुत ही दुखद है कि जय श्री राम का नारा लगाने पर तमतमा कर एक सूबे की मुख्यमंत्री अपनी कार को रोक कर सड़क उतर जाती है सारे प्रोटोकॉल धरे के धरे रह जाते अधिकारियों से कहते हैं इसे अरेस्ट करो और जेल में डाल दो और जब वह फिर गाड़ी में बैठती है तो भीड़ फिर चिल्ला उठता है जय श्रीराम ।कितना मखौल उड़ता है एक पद की गरिमा का,यह कदम उनके समर्थकों में कितना जहर घोलता है जय श्री राम कहने बालों के विरुद्ध और ऐसे लोग एक ऐसे शब्द के लिए लोंगो की हत्या करने के लिए उतारू हो जाते है जसका कोई मतलब नही है ।
दुर्भाग्य तो यह है कि मॉब लीचिंग के शिकार हुए उन लोंगो के लिए हम इंसाफ की उम्मीद कैसे कर सकते हैं जब इस मामले के आरोपी जेल से छूट कर आये तो उसे फूल माला पहना कर एक दल विशेष के राजनेता और केंद्र में मंत्री स्वागत करे ।
तबरेज के मामले में भी कई राजनेता यह बचाव करने के लिए बयान बाजी करना शुरू कर दिया कि वह चोर था ।भाई चोर को मारने की इजाज़त कानून देती है किया अगर ऐसा है तो फिर कोर्ट ,जज और कानून किस चीज के लिए है ।
फिर एक चोर को जय श्रीराम का नारा लगबाने की किया जरूरत है ।उसके पीछे की मानसिकता किया है उसे समझने की जरूरत है ।
संसद से लेकर सड़क तक सत्ता से लेकर शियासत तक,सोच से लेकर बैचारिकता तक सभी में बदलाव की जरूरत है तभी अमन चैन कायम हो सकता है ।अगर आप को लोग संसद में भी भेजता है तो आप को वहां जय भारत जय कानून और जय राष्ट्र कहने की जरूरत है ना की जय राम ,जय महादेब, अल्ला हो अकबर कहने के लिए ।
क्यों कि यह शब्द आप की अपनी है, आप का यह ब्यक्तिगत आस्था है । और आप को इसे आपने तक सीमित रखना चाहिए।धर्म और आस्था भवनात्मक चीज है और वह हर आदमी का अलग अलग है , लेकिन ऐसे जगहों से इस तरह की बाते और आप की भावनाएं और लोंगो को बंटने का संदेश देता है । इस परंपरा को हमे रोकना होगा ।ताकि लोंगो की मानसिकता में बदलाव आए।
सत्ता की जिम्मेदारी है कि आप ऐसा काम करो ,कि देश बटे नही,देश टूटे नही,बल्कि सभी मे प्यार हो,एक दूसरे के प्रति सम्मान हो तभी मज़बूत भारत,अटूट भारत और नया भारत बनेगा।
7 जुलाई 2019
Thursday, 21 August 2014
Monday, 18 August 2014
वह बरगद पेड़
Saturday, 16 August 2014
कबिता
१
रेगिस्तान के रेत पर
फैला हुआ
ुवा कवि जालाराम की कविताए वो रातें..... वो रातें अब कहाँ गई, जब पल भर में सो जाते थे वो सपने अब कहाँ गए, जब पल भर में रो जाते थे यादों का ...
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इस शहर में अकुलाहट और भागम दौड़ से थका हुआ सा जब एक चौराहे पर रुकता हूँ तो ----- हडबडाया सा एक भीड़ गुजर जाती है मेरे सामने...

