मैं अपने ब्लॉग के माध्यम से आप से एक ऐसा रिश्ता कायम करना चाहता हूँ जिससे हम बैचारिक रूप से समृद्ध हो सकें |आप सभी की अंतरात्मा की कथा अंतर्कथा |
Monday, 31 October 2022
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
ुवा कवि जालाराम की कविताए वो रातें..... वो रातें अब कहाँ गई, जब पल भर में सो जाते थे वो सपने अब कहाँ गए, जब पल भर में रो जाते थे यादों का ...
-
ुवा कवि जालाराम की कविताए वो रातें..... वो रातें अब कहाँ गई, जब पल भर में सो जाते थे वो सपने अब कहाँ गए, जब पल भर में रो जाते थे यादों का ...
-
इस शहर में अकुलाहट और भागम दौड़ से थका हुआ सा जब एक चौराहे पर रुकता हूँ तो ----- हडबडाया सा एक भीड़ गुजर जाती है मेरे सामने...
No comments:
Post a Comment